विधान परिषद चुनाव की हलचल कांग्रेसके प्रत्याशी की घोषणा होते ही शिक्षक संघ शर्मा गुट को होने लगी परेशानी


भास्कर
मेरठ, 26 फरवरी। प्रदेश में शिक्षक व स्नातक एमएलसी पद के चुनाव में भी कांग्रेस ने भी इस चुनावी संग्राम में कूदने का फैसला कर लिया। इस फैसले के अनुरूप कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी के नाम का भी ऐलान कर दिया। इस घटनाक्रम ने कांग्रेसी विचारधारा वाले माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के नेताओं के चेहरे पर परेशानी की लकीरें साफ नजर आने लगी है। उल्लेखनीय है कि गत चार दशकों  से शिक्षक और स्नातक की विधान परिषद की मेरठ-सहारनपुर की सीटों पर माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट का जीत का नगाड़ा बजता रहा है। अब इस चुनाव में राजनीतिक दलों के चुनाव में आने से शर्मा गुट का वर्चस्व खतरे में पड़ता हुआ दिखायी दे रहा है।
गौरतलब है कि इस बार भाजपा के अलावा सपा व कांग्रेस भी इस चुनाव में करिशमें की उम्मीद कर रहे है। वहीं सत्ता पक्ष भाजपा इस चुनाव में पूरी ताकत को झौंक रही है। भाजपा का मतदाताओं पर सतर्क दृष्टि व कार्यकताओं को जिम्मेदारी का निर्वहन कर सत्ता का लाभ मिलना तय मान रही है। भाजपा के एक प्रमुख नेता ने अपना नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि इस बार चुनाव में  शर्मा गुट वर्चस्व अवश्य टूट जायेगा। कांग्रेस, सपा अन्य शिक्षक संघों  के प्रत्याशी वोट कटुआ बनकर हमारी जीत में विशेष भूमिका अदा करेंगे। इसके अलावा हमारे प्रत्याशी को राजकीय शिक्षक संघ तथा वित्तविहीन संघों का समर्थन हमारी जीत का रास्ता सुगम करेगा।  वहीं भाजपा अपनी इस रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। वहीं ठकुराई गुट व दबथुआ गुट ने भी अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। यह प्रत्याशी माध्यमिक शिक्षकों के मतों को विभाजित करेंगे।
शिक्षक राजनीति के जानकारों का मानना है कि शर्मा गुट को गत सालों में राजकीय और वित्तविहीन संस्थाओं का समर्थन मिलता रहा है। इस बार यह समर्थन मिलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। यह बात शर्मा गुट के प्रत्याशियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। वहीं कांग्रेस के अलावा सपा के प्रत्याशी भी इस चुनाव में अपनी मजबूती का दावा कर रहे हैं। वहीं स्नातक सीट पर कई प्रत्याशी मजबूती के साथ चुनाव में दिखाई दे रहे हैं। 
गौरतलब है कि शर्मा गुट के नेताओं का मानना है कि गत 48 सालों से शिक्षक हमारा साथ दे रहे हैं। हमने शिक्षकों के हितों को सर्वोपरि माना है। शिक्षक व स्नातक सीटों पर हमारे साथ हैं और इस चुनाव में भी रहेंगे। यह चुनाव राजनीतिक दलों व शिक्षकों संघों की प्रतिष्ठा को तय करने वाला साबित होगा। अब यह भविष्य के गर्भ में है कि कौन किस पर भारी पडे़गा। मतदाताओं के आंकलन से लगता है कि इस बार शर्मा गुट के लिए पनघट आसान नहीं होने वाली।
गौरतलब है कि इस बार भी शर्मा गुट में बुढ़ाऊ नेता शर्मा जी को शिक्षक सीट पर उतारा है। इस बार चुनाव में शर्मा जी को उतारने के खिलाफ अनेक नेता दिखाई दे रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि अब शर्मा जी को एमएलसी की सीट का लोभ त्याग देना चाहिए तथा किसी युवा शिक्षक को इस सीट पर प्रत्याशी बनाना चाहिए था।