फिल्मी तारिकाओं के अनुरोध को ठुकराया दिया


वामपंथी व जेएनयू समर्थक स्वरा व तापसी से प्रचार कराना ठीक न समझा केजरीवाल ने
दिल्ली ब्यूरो
नई दिल्ली, 10 फरवरी। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने चुनाव की रणनीति में यह बात को समझ लिया था कि अगर उन्होंने वामपंथी व टुकड़े-टुकड़े गैंग समर्थक फिल्मी सितारों का चुनाव प्रचार में सहयोग लेंगे तो यह उनके लिए चुनाव में नुकसानदायक साबित हो सकता है। क्योंकि भाजपा राष्ट्रवाद के मुद्दे पर उन्हें घेरने में कोई कसर नही छोड़ेगी। जिसका मतलब इस चुनाव में उनकी मात की शक्ल में आ सकता है। यही कारण है कि उन्होने जब फिल्मी अभिनेत्री तापसी पन्नू द्वारा उनके चुनाव प्रचार में सहयोग देने का आफर किया गया तो केजरीवाल ने स्पष्ट इंकार कर दिया। 
यही नही बल्कि फिल्मी अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी आप के नेताओं से चुनाव प्रचार में भाग लेने की इच्छा प्रगट का गयी थी। इस अभिनेत्री से भी आप के चुनाव प्रबंधको ने साफ इंकार कर दिया।  यह  भी पता चला है कि छपाक की अभिनेत्री ने भी केजरीवाल की पार्टी के लिए चुनाव प्रचार में सहयोग देने की इच्छा प्रगट की गयी थी। उससे भी इंकार कर दिया गया। मुम्बई के फिल्म क्षेत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टुकड़े-टुकड़े गैंग से सहानुभूति रखने वाले व वामपंथी विचारधारा के समर्थक फिल्म अभिनेत्री, अभिनेता तथा अनुराग कश्यप जैसे फिल्म निदेशक आम आदमी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार में आने को इच्छुक थे। लेकिन इस सभी से आम आदमी पार्टी के नेताओं उनकी सेवाओं को लेने से इंकार कर दिया।
इसका कारण यह बताया जाता है कि केजरीवाल इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि मुस्लिम समर्थक वामपंथी फिल्मकारों की चुनाव प्रचार में सहयोग लिया तो उनपर भी देश विरोधी होने का ठप्पा लग  जायेगा। इस तरह भाजपा उन्हें मात देने की स्थिति में आ जायेगी। अतः उन्होंने वामपंथी फिल्मी कलाकारों को अपने प्रचार से दूर रखा। इसका चुनावी लाभ भी उन्हे चुनाव मतदान के समय मिलता हुआ दिखायी दिया। इसके अलावा एक सोची समझी रणनीति के तहत  चुनाव से पहले जमकर विज्ञापन देने के लिए अपनी मुटठी को खोल दिया, इसका असर भी दिखायी दिया जब चुनाव मतदान के समय  तथाकथित तटस्थ संवाददाता मुस्लिम बुर्कापोश महिलाओं से तथा गोल टोपी पहने वाले लोगों से सवाल जवाब पूछते नजर आए। जाहिर है इनका जवाब आप के हक में ही आता दिखाई दिया। इसका मतलब यह है कि यह चैनल के संवाददाता उन्हें मिले विज्ञापनों का हक ही अदा कर रहे थे। 
यही बात चैनलों के द्वारा एग्जिट पाॅलों में भी नजर आ रही थी। इस बात को आम आदमी के नेता समझ रहे थे। यही कारण था कि उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवालिया निशान लगाने शुरु कर दिए। आप नेता संजय सिंह ने भी खुलकर चुनाव आयोग पर प्रश्न चिन्ह  लगाया। इससे पता चलता है कि आम आदमी पार्टी के नेताओं को चैनलों के द्वारा दिखाए गए एग्जिट पाॅल की असलियत पर संदेह था। अब उन्होंने चुनाव आयोग पर सवालिया निशान लगाकर यह बात साबित कर दी कि चित भी अपनी और पट भी अपनी।