नगर प्रतिनिधि
मेरठ, 21 फरवरी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मेरठ रैंज के औघड़नाथ शिव मंदिर, पुरा महादेव मंदिर के अलावा दूधेश्वर मंदिरों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था दिखायी दी। गत गुरूवार को रात्रि 12 बजे से ही इन प्रसिद्ध शिवमंदिरों की सुरक्षा को कड़ा कर दिया था। इसके अलावा पावन पर्व महाशिवरात्रि के नजदीक आते ही हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर आ रहे शिवभक्तों कावड़ियों का सैलाब हर दिन बढ़ता ही जा रहा है।
गौरतलब है कि गत गुरूवार को दिन भर विशाल और खड़ी कांवड़ को लेकर शिव भक्त अपने गतंव्य स्थान की ओर भोले बाबा के जयकारे लगाते हुए बढ़े जा रहे थे। जहां-जहां शिविर लगे थे वहां शिवभक्तों ने कांवड़ियों की सेवा करते हुए दिखायी दिए।
इस बार औघड़नाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर पूजन के साथ ही भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है। मंदिर समिति के महामंत्री सतीश सिंघल का कहना है कि महाशिवरात्रि को सुबह चार बजे से मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जायेंगे और मंदिर देर रात तक खुला रहेगा। शाम सात बजे , 11 बजे, रात में एक बजे व शनिवार सुबह चार बजे विशेष आरती की जायेगी। मंदिर में जलाभिषेक के लिए प्रबंधन की ओर से तांबे के एक हजार लोटे की व्यवस्था की गयी है। यह माना जा रहा है कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर लगभग दो लाख श्रद्धालु भोले बाबा का जलाभिषेक करेंगे।
गौरतलब है कि हर चंद्र मास का 14वां दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिव रात्रि के नाम से जाना जाता है। एक कलेंडर वर्ष में आने वाली सभी शिवरात्रियों में महाशिव रात्रि को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार महाशिव रात्रि आज 21 फरवरी को है। चर्तुथदर्शी तिथि का आरंभ शाम 05 बजकर 21 मिनट से शुरु हो जाएगा। जो अगले दिन शनिवार की शाम 07 बज कर दो मिनट तक रहेगा। महाशिव रात्रि पर पूरी रात शिव भक्त जागरण करते हुए शिव जी के विवाह का उत्सव मनाते हैं। महाशिव रात्रि के दिन ही शिव जी के साथ माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसी दिन शिव शंभु ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। महाशिव रात्रि का व्रत महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इसके बारे में मान्यता है कि अविवाहित कन्या अगर विधि पूर्वक इस व्रत को रखती है तो उसका विवाह सुयोग्य वर से होता है। विवाहित महिलाएं अपने सुखद वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत को धारण करती है। वैसे भी यह माना जाता है कि भोले के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं आता। महाशिव रात्रि के व्रत से जीवन में पापों का नाश हो जाता है। इसलिए इस व्रत को व्रतों का राजा माना जाता है।
शिव पूजा में बेल पत्रों का विशेष महत्व माना गया है। बेल को शिव स्वरुप बताया गया है। महाशिव रात्रि की कथा में बताया गया है कि एक शिकारी वन्य जीवों के डर से बेल के पेड़ पर रात भर बैठा रहा। पेड़ के नीचे शिवलिंग था जिस पर वह बेल के पत्ते तोड़कर गिराता रहा। अंतत शिकारी के सामने भगवान शिव प्रकट हुए और वह मोक्ष का अधिकारी बन गया।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बम-बम के जयघोष से गूंजे शिवालय, सड़कों पर कांवड़ियों का उमड़ा सैलाब