दिल्ली प्रदेश के चुनावों में कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्द कहने की रणनीति अपनाई
विशेष प्रतिनिधि।
नई दिल्ली, 8 फरवरी। आज दिल्ली प्रदेश विधान सभा के लिए चुनाव मतदान शुरु हो चुका है। इस चुनाव से पहले कांग्रेस, आम आदमी पार्टी तथा कांग्रेस के नेताओं ने चुनाव प्रचार में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर लटठ मारने का बयान देकर इस चुनाव में अपशब्दों का घालमेल कर दिया। इसके जवाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देते हुए कह दिया कि पिछले अनेक सालों से कांग्रेस के द्वारा उनके लिए अपशब्द इतने कहे गए हैं कि उनको इनके सहने की आदत हो गई है। अब कांग्रेस के एक नेता ने कहा है कि देश के युवा छह महीने के बाद उन पर लटठ बरसाएंगे। इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह सूर्य नमस्कार करके अपनी पीठ को इतना मजबूत कर लेंगे कि उस पर लटठ पड़ने का कोई असर नहीं होगा।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के इस बयान आने के बाद कांगे्रस के राहुल गांधी की काफी आलोचना हुई। इसके पश्चात अगले दिन संसद में स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एक प्रश्न के उत्तर देने से पहले यह कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के लिए जिस तरह के शब्द कहे हैं। उन्हें इन शब्दों के लिए माफी मांगनी चाहिए। हर्षवर्धन का यह कहना था कि तभी राहुल गांधी के इशारे करने पर कांग्रेस के एक सांसद अपनी सीट से उठकर सत्ता पक्ष की तरफ आए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के हाथों से कागजात लेने का प्रयास करते हुए। उन पर हाथ चलाने का प्रयास किया। वहीं भाजपा के एक सदस्य से उनकी गुथमगुथा हो गई। इस घटना से पूरे सदन में हंगामा मच गया तथा लोकसभा स्पीकर ने सदन को स्थगित कर दिया।
इस प्रकरण के सामने आने पर यह बात दिखाई दे रही है कि कांगे्रस ने प्रधानमंत्री पर प्रहार करके यह बात साबित करने की सोची थी कि दिल्ली के विधान सभा चुनाव में भाजपा के साथ उनका मुख्य मुकाबला हो जाएगा। लेकिन अपशब्द कहने से उल्टे ही कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान हो गया।
गौरतलब है कि कांग्रेस इस प्रदेश में आम आदमी पार्टी तथा भाजपा के हो रहे मुख्य मुकाबले में तीसरा कोण बनना चाहती थी। कांगे्रस इस चुनाव में तीसरे नंबर पर नजर आ रही थी। इसके अलावा कांगे्रस के स्टार प्रचारक भी पूरे चुनाव के प्रचार के दौरान कहीं भी नजर नहीं आए। अब इस प्रकरण के बाद कांग्रेस के नेता अगर यह सोच रहे थे कि उन्हें भाजपा पर प्रहार करने से राजनीतिक लाभ मिल जाएगा। ऐसा हो न सका। कांग्रेस की हालत ऐसी हो गई कि उसके प्रत्याशी भी पूरे चुनाव के दौरान अपने स्टार प्रचारकों जिनमें शत्रुघन सिन्हा, नवजोत सिंह सिद्धू तथा नगमा आदि का इंतजार करते रहे। चुनाव के समीप आने पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करके और पार्टी की भद्द पिटवा दी। अब कांग्रेस इस बात का इंतजार कर रही है कि आम आदमी पार्टी को अगर बहुमत नहीं मिलता है तो कांग्रेस उसके साथ गठबंधन करके सरकार में शामिल हो जाएगी।