डिनर बहिष्कार कांग्रेस को भारी पड़ा लुटियन्स जोन के तीसमारखांओं के अरमानों पर पानी फिरा, ट्रंप ने  पाक परस्ती नहीं बल्कि मोदी परस्ती ही दिखाई


दिल्ली ब्यूरो। 
नई दिल्ली, 26 फरवरी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तथाकथित लुटियन्स जोन के तीसमारखां इस बार अपने आकंलन में गलत साबित हुए। यह लोग सोच रहे थे कि अमरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनकी पाक परस्ती पर ही अपनी मोहर लगा देंगे। इस वजह से ही उन्होंने अपने चमचों के द्वारा दिल्ली में हिंसा को बुरी तरह से भड़काया था। शाहीन बाग के बाद जाफराबाद में औरतों को धरना प्रदर्शन पर बिठा कर इन तीसमारखांओं ने एक तरह से मोदी के खिलाफ माहौल तैयार कर दिया था। यह लोग सोच रहे थे कि ट्रंप भारत में आकर पाकिस्तान के समर्थन में अपना विचार व्यक्त कर देंगे। 
इतना ही नहीं ट्रंप की प्रेसकांफ्रेंस में लुटियन्स जोन से प्रभावित एक संवाददाता ने अमेरिकन राष्ट्रपति से कश्मीर में धारा 370 हटाने के अलावा सीएए पर सवाल कर दिया। यह संवाददाता यह सोच रहा था कि ट्रंप इस सवाल का जवाब वह देंगे जोकि पाकिस्तान के समर्थन में काम आएगा। लेकिन ट्रंप ने इस संवाददाता के मन माफिक जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सीएए का मामला भारत का आंतरिक मामला है। इसके अलावा भारत द्वारा धारा 370 को हटाना भी भारत का अपना मसला है। इसमें किसी बाहरी को दखल ेदेने का अधिकार नहीं है। यह जवाब लुटियन्स जोन के तीसमारखांओं के अनुरुप नहीं था। इससे उन्हें भारी आघात लगा है। 
इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा अमरिकन राष्ट्रपति के स्वागत में दिए गए डिनर का बहिष्कार करके अपनी ही जग हसाईं कर ली है। गौरतलब है कि कांग्रेस के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चैधरी ने पहले से ही ऐलान कर दिया था कि वह चाहते हैं कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को राष्ट्रपति के द्वारा दिए गए डिनर में निमंत्रित किया जाए। जब सरकारी सूत्रों ने इस तरह का कार्य करने से इंकार कर दिया तो चैधरी ने यह भी ऐलान कर दिया कि वह इस डिनर का बहिष्कार करेंगे। इस डिनर में पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के अलावा राज्य सभा में कांग्रेस दल के विपक्षी नेता गुलाम नबी आजाद को भी निमंत्रित किया गया था। जब मनमोहन सिंह व गुलाम नबी आजाद को इस बात का पता चला कि सोनिया गांधी को इस डिनर में निमंत्रित नहीं किया गया है तथा इसी कारण अधीर रंजन चैधरी ने इस डिनर का बहिष्कार कर दिया है। इस नाते मनमोहन सिंह ने अपने स्वास्थ्य का बहाना कर इस डिनर में शामिल होने में असमर्थता व्यक्त कर दी। इतना ही नहीं गुलाम नबी आजाद ने भी इस डिनर में शामिल होने से इंकार कर दिया। 
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्वारा अमरिकन राष्ट्रपति के स्वागत में डिनर देने की परंपरा रही है। कांग्रेस के शासन काल में अनेक अमरिकन राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आए थे। इस दौर में राष्ट्रपति ने स्वागत में डिनर का आयोजन किया था। इस अवसर पर विपक्षी दल के नेता को आमंत्रित नहीं किया गया था। अतः उसी परंपरा के अंतर्गत सोनिया गांधी को निमंत्रित नहीं किया गया। ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी चाहती थी कि सोनिया गांधी को इस डिनर में बुलाकर सरकार परिवारवाद को समर्थन दे। लेकिन कांग्रेस की इस इच्छा को सरकार ने पूरा नहीं किया।